"how to write ?"
"भैया, अगर मुझे कुछ लिखना है तो कैसे लिखें ?"
"कृष्ण, मैं भी लिखना चाहता/चाहती हूँ, पर कैसे लिखूँ"
Here is the blog, I created for all the people.
"Just start to express yourself."
जब भी हम लिखना शुरू करते हैं तो हमारी सबसे बड़ी mental chalange यह होता है कि हमें perfection चहिए होता है, कि जब तक हमें यह feel ना हो कि हम जो लिखे हैं वो perfect है, हम उसे share करने से हिचकिचाते हैं। क्योंकि बचपन से हमें यही सिखाया गया है। हम डरते हैं कोई गलती करने से।
पर अगर गलती करने से डरोगे और try ही नहीं करोगे तो कैसे सीखोगे ?
इस blog में कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आप कैसे लिख रहे हो, उसके grammatical errors, etc कुछ भी मायने नहीं रखता। आप बस खुद को express करना शुरू करो। आप करते-करते एक दिन खुद बेहतर बन जाओगे।
लिखने कि सबसे अच्छी बात यह होती है कि हम इसे बाद में edit/सुधार कर सकते हैं।
आपको जो चीज में जैसे लिखना है, आप बस शुरू करो। आपके भाव जब शब्द लेना शुरू करेंगे तो अपने आप दिशा पकड़ लेंगे। आपको उसका शुरुआत कैसे रखना है और अंत कैसे करना है, यह लिखते time आपको अपने आप feel हो जाएगा।
For example, अभी जो आप पढ़ रहे हो इसमें जो-जो points मुझे share करने का मन किया, उसे मैं पहले लिखा। उसको ऊपर-नीचे मैं बाद में भी arrange कर सकता हूँ। और ये जो font styling है, उसे मैं बाद में कर रहा हूँ।
आपके अनुभव दूसरों को सीखने में मदद करेंगे। आपके thoughts and perspectives लोगों को आपका vision दिखाएगा।
Just start writing, आपके शब्द अपने आप flow पकड़ लेंगे। मेरे इस Blog में आपको perfect होने का कोई जरूरत नहीं है। बस आप खुद को express करना शुरू करो।
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